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लखनऊ/देवरिया उत्तर प्रदेश। सख्त अफसर का तबादला ? देवरिया से DGP मुख्यालय तक _उपलब्धियों के बीच उठे सवाल ? लखनऊ/देवरिया उत्तर प्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट

*सख्त अफसर का तबादला* :

 

*देवरिया से DGP मुख्यालय तक— उपलब्धियों के बीच उठे सवाल*”

लखनऊ/देवरिया उत्तर प्रदेश से राजेश कुमार यादव की खास रिपोर्ट ।

देवरिया जिले में अपनी सख्त कार्यशैली और ताबड़तोड़ कार्रवाई के लिए पहचान बना चुके पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन तिवारी का अचानक तबादला कर उन्हें डीजीपी मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। महज 7 महीने पहले, 18 सितंबर 2025 को देवरिया की कमान संभालने वाले इस तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी ने अल्प समय में कानून-व्यवस्था की दिशा में कई उल्लेखनीय कदम उठाए, जिससे वे चर्चा में रहे।

 

संघर्ष से शिखर तक का सफर

बिहार के खगड़िया जनपद के सामान्य परिवार से आने वाले संजीव सुमन तिवारी ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर वर्ष 2014 में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर आईपीएस सेवा में स्थान पाया। उनका जीवन संघर्ष और सेवा भाव युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।

 

परिवार भी सेवा में अग्रणी

उनकी पत्नी पूजा (IPS) वर्तमान में 45वीं बटालियन पीएसी, अलीगढ़ में तैनात हैं। सूत्रों के अनुसार, वे पारिवारिक कारणों से नजदीकी जनपद में तैनाती की इच्छा रखते थे, लेकिन अचानक हुए इस तबादले के पीछे अन्य कारणों की भी चर्चा तेज हो गई है।

 

कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां

एसपी तिवारी के कार्यकाल में कई बड़े मामलों का खुलासा हुआ और सख्त संदेश भी गया—

 

*लगभग 60 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश*

 

*नकली नोटों के बड़े गिरोह का भंडाफोड़*

 

*गौ तस्करी पर सख्त कार्रवाई, कई थाना प्रभारी निलंबित*

 

*पासपोर्ट वेरिफिकेशन में रिश्वतखोरी पर शिकंजा*

 

*गड़बड़ी पर पूरी SOG टीम तक हटाई गई*

 

*पुलिस कर्मियों पर भी कार्रवाई, दोषियों को जेल भेजा*

 

*करोड़ों की चोरी का सफल खुलासा*

 

*स्पा सेंटरों पर छापेमारी, 11 लोगों पर FIR*

 

*संवेदनशील मामलों में कुशल लॉ एंड ऑर्डर नियंत्रण*

 

क्या सख्ती बनी वजह?

संजीव सुमन तिवारी की कार्यशैली को जहां आम जनता ने सराहा, वहीं उनकी सख्ती और पारदर्शिता कुछ प्रभावशाली वर्गों को असहज कर गई—ऐसी चर्चाएं जोरों पर हैं। छोटे से छोटे मामलों में सीधी कार्रवाई और विभागीय अनियमितताओं पर कठोर रुख अपनाने से वे सिस्टम के भीतर भी चर्चा का विषय बने रहे।

 

सवालों के घेरे में तबादला

अचानक हुए इस तबादले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक सक्रिय और ईमानदार अधिकारी को इसी तरह हटाया जाना उचित है, या इसके पीछे प्रशासनिक रणनीति है—यह स्पष्ट नहीं हो सका है।

 

निष्कर्ष

फिलहाल तबादले के आधिकारिक कारण सामने नहीं आए हैं, लेकिन देवरिया में उनके कार्यकाल की छाप लंबे समय तक याद की जाएगी। कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर उनकी सख्त छवि और त्वरित निर्णय शैली ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई, जो अब चर्चा और बहस दोनों का विषय बन चुकी है।

 

 

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